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यूँ गई क़द के ख़म हुए जैसे उम्र इक रहरव सर-ए-पुल था

As if the stature's flaws vanished, just like a playful stream over a bridge.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जैसे क़द के ख़ाम (कमियाँ) दूर हो गए, ठीक वैसे ही जैसे एक नटखट धारा पुल के ऊपर से बह जाती है।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी की नश्वरता और खूबसूरती के ढल जाने का बेहतरीन तसव्वुर है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जिस तरह कोई चीज़ अपनी शान खो देती है, हमारा जीवन भी बस एक पड़ाव है। यह जीवन, एक पुल को पार करने जैसी है। यह शेर हमें सिखाता है कि हर चीज़, चाहे वो कितनी भी मज़बूत क्यों न लगे, वक़्त के साथ झुक जाती है। एक बहुत गहरा एहसास है यह...

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