आदम-ए-ख़ाकी से आलम को जिला है वर्ना
आईना था ये वले क़ाबिल-ए-दीदार न था
“From the dust of Adam, the world was brought to life; otherwise, this mirror would not have been worthy of sight.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आदम-ए-ख़ाकी से पूरे आलम को जीवन मिला है, वरना यह आईना किसी के देखने लायक़ नहीं था।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की गहरी सोच को दर्शाता है। पहले मिसरे में शायर कहते हैं कि यह पूरा आलम.... महज़ मिट्टी से ज़िंदा है! मतलब, दुनिया का वजूद किसी बड़े चमत्कार से है। और दूसरे मिसरे में ये बात आती है कि ये आईना.... या ये नज़ारा, किसी ऐसे व्यक्ति के लिए था.... जो इसे देखने के काबिल ही नहीं था। यह एक तरह की नज़दीकी की दूरी है।
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