किस रात नज़र की है सू-ए-चश्मक-ए-अंजुम
आँखों के तले अपने तो वो माह-जबीं था
“On which night did your gaze turn towards the eye of the stars? For beneath these eyes, you were the glorious moon.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
किस रात ने तारों की आँखों की ओर अपनी नज़र घुमाई? क्योंकि अपनी आँखों के नीचे तो तुम चाँद की तरह चमकते थे।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की नज़रों का कमाल है। शायर एक सवाल पूछते हैं: आपने तारों की आँखों में कब देखा? यह सवाल एक विशाल, ब्रह्मांडीय नज़ारे की बात करता है। लेकिन दूसरी लाइन में जवाब मिलता है— कि आपकी अपनी आँखों में तो वो चाँद का कोमल नूर था। यह दिखाता है कि महबूब का जादू कहीं दूर तारों में नहीं, बल्कि नज़दीक, दिल के करीब है।
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