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जाना नहीं कुछ जुज़ ग़ज़ल कर के जहाँ में कल मेरे तसर्रुफ़ में यही क़ित' ज़मीं था

In this world, nothing is dearer than a ghazal, For once, this entire earth was within my command.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जहाँ में कुछ भी ग़ज़ल से ज़्यादा क़ीमती नहीं है, क्योंकि कल यह पूरी ज़मीन मेरे वश-में थी।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरे एहसास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ भी हमेशा के लिए हमारा नहीं होता। जो चीज़ें कल हमारे बस में थीं—चाहे वह ज़मीन का कोई टुकड़ा हो, या शायरी का कोई नज़्म—वक्त के साथ, उनका अधिकार बदल जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि दुनिया में कोई भी चीज़ स्थायी नहीं होती, और न ही कोई शक्ति हमेशा बनी रहती है।

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