ज़मींगीर हो इज्ज़ से तू कि इक दिन
ये दीवार का साया दीवार होगा
“O, owner of the land, with such pride, remember that one day, This shadow of a wall will itself become a wall.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे ज़मींदार, अपनी शान से यह याद रखना कि एक दिन, यह दीवार का साया स्वयं एक दीवार बन जाएगा।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का एक बहुत गहरा संदेश है। शायर कह रहे हैं कि अपनी इज़्ज़त और अपनी पहचान को बनाए रखना, क्योंकि वक़्त के साथ... हर चीज़ बदल जाती है। वो कहते हैं कि इस दीवार का साया भी एक दिन दीवार बन जाएगा। इसका मतलब है कि कोई भी दिखावा या सहारा हमेशा नहीं रहता।
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