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उस के कूचे में हश्र थे मुझ तक आह-ओ-नाला करे अब कोई

In his lane, my ruin was complete, No one now cries out with sigh and lament.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उस के कूचे में मेरा हश्र हो चुका था, इसलिए अब कोई आह-ओ-नाला नहीं करता।

विस्तार

ये शेर दिल की बहुत गहरी बात कहता है। शायर कह रहे हैं कि मेरे टूटने का कारण, मेरे हश्र का ठिकाना, महबूब के ही कूचों में था। इतना गहरा दर्द था कि अब... न कोई आह भरेगा, न कोई नाला रोएगा। यह सिर्फ़ दर्द की बात नहीं है, यह एक तरह की क़ुबूलियत है। जैसे, 'अब रोने से क्या फ़ायदा, क्योंकि मेरे टूटने की वजह तो बस आप थे।'

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