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रंज खींचे थे दाग़ खाए थे दिल ने सदमे बड़े उठाए थे

You had drawn sorrow's stain, endured wounds of suffering, The heart had lifted burdens of profound shock.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

रंज और दाग़ खींचने थे, और दिल को बड़े सदमे उठाने थे।

विस्तार

इस शेर में मिर्ज़ा तक़ी मीर ने दिल के गहरे ज़ख्मों को बयां किया है। यह सिर्फ एक दर्द नहीं है, बल्कि वो सारे रंज और दाग़ हैं जो समय के साथ दिल पर चढ़ गए हैं। शायर कह रहे हैं कि दिल ने एक बार टूटना नहीं देखा.... बल्कि सदियों के सदमे उठाए हैं! यह एहसास दिलाता है कि दर्द कभी एक पल का नहीं होता, यह ज़िंदगी भर का साथ होता है।

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