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बरफ़रोख़्ता रुख़ है उस का किस ख़ूबी से मस्ती में पी के शराब शगुफ़्ता हुआ है उस नौ-गुल पे बहार है आज

Her face is pure as snow, in what exquisite manner she is steeped in intoxication; Today, spring has bloomed upon that beautiful maiden, who has become tipsy from the wine.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उसका चेहरा बर्फ जैसा निर्मल है, और किस ख़ूबसूरती से वह मस्ती में डूबी है; आज, उस नौजवान लड़की पर बहार आई है, जो शराब पीने से मदहोश हो गई है।

विस्तार

यह शेर उस बेरुखी और मस्ती के अनोखे मेल को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि महबूब का चेहरा बर्फ़ जैसा ठंडा है, लेकिन उसमें एक अजीब सी नशा भरी मस्ती है। ऐसा लगता है जैसे महबूब ने शराब पी ली है, और उसी नशे के कारण, उस नौ-पंखुड़ी वाले फूल पर आज बहार आ गई है। यह शेर दर्द और जश्न, दोनों का एहसास कराता है।

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