ऐ 'नज़्म' क्या बताएँ हज्ज-ओ-तवाफ़ अपना काबे में भी किसी की महमिल को ढूँडते हैं

“O Nazm, how can I recount our pilgrimage and sacred circumambulation? Even within the Kaaba, it is the beloved's palanquin that we seek.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ऐ नज़्म, हम अपने हज और तवाफ़ का क्या हाल बताएं, हम तो काबा जैसी पवित्र जगह में भी महबूब की डोली तलाश रहे हैं।

विस्तार

इस शेर में नज़्म एक बहुत ही नाज़ुक और सच्चा इज़हार कर रहे हैं कि इश्क़ इंसान के दिलो-दिमाग़ पर किस तरह छा जाता है। वे कहते हैं कि हम काबा जाकर हज और तवाफ़ तो कर रहे हैं, लेकिन दिल की बेबसी यह है कि उस सबसे मुक़द्दस मुक़ाम पर भी आँखें ख़ुदा के नूर के बजाय महबूब की डोली (महमिल) तलाश रही हैं। यह शेर दिखाता है कि जब मोहब्बत हद से बढ़ जाए, तो इबादत और इश्क़ के फ़र्क़ भी मिट जाते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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