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যদি কেউ কথা না কয়, ওরে ওরে অভাগা, যদি সবাই থাকে মুখ ফিরায়ে সবাই করে ভয়

যদি কেউ কথা না কয়, ওরে ওরে ও অভাগা, যদি সবাই থাকে মুখ ফিরায়ে সবাই করে ভয়—

रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

यदि कोई बात न करे, अरे, अरे, अरे अभागे, यदि सब मुँह फेर लें और सब डरें।

विस्तार

यह दोहा उस गहरे अकेलेपन और डर को दर्शाता है जो तब महसूस हो सकता है जब कोई आपके साथ खड़ा न हो। यह एक ऐसी स्थिति का वर्णन करता है जहाँ हर कोई चुप रहता है, डर के मारे अपना मुँह मोड़ लेता है। कल्पना कीजिए कि आप ऐसे पल में हैं जहाँ कोई भी सच्चाई या न्याय के लिए बोलने की हिम्मत नहीं करता, और हर कोई समर्थन देने से बहुत डरता है। ये पंक्तियाँ हमें उस अकेलेपन के अहसास की याद दिलाती हैं जब आपको चुनौतियों का अकेले सामना करना पड़ता है, और आप ऐसे लोगों से घिरे होते हैं जो कार्य करने से बहुत डरते हैं। यह दूसरों के चुप रहने और आशंका में पीछे हटने पर भी आगे बढ़ने के लिए आवश्यक साहस के बारे में है।

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