“They put my heart to shame, O Wali, whenever those cypress-tall beauties walk in graceful stride.”
ऐ वली, जब सीधे और लंबे कद वाले महबूब नाज़-ओ-अंदाज़ से चलते हैं, तो वे मेरे दिल को लज्जित कर देते हैं।
वली दकनी यहाँ महबूब के सीधे और सलोने क़द की तुलना 'सर्व' (सरू के पेड़) से कर रहे हैं, जो हुस्न और सलीके की मानीफ़ेस्ट मिसाल है। जब ऐसे दिलकश महबूब नज़ाकत से अपनी चाल चलते हैं, तो आशिक़ का दिल अपनी बेक़रारी और बेबसी पर ख़ुद ही लजा जाता है। यह शेर हुस्न की उस जादुई शान को बयां करता है जिसके सामने दिल की सारी होशियारी और क़ाबू पानी-पानी हो जाता है।
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