“Among the wise, each excels the next, O Akbar; yet among the passionately mad, I found none like you.”
ऐ अकबर, समझदार और अक्लमंद लोगों में तो एक से बढ़कर एक मौजूद हैं, लेकिन दीवानों में मुझे तेरे जैसा कोई नहीं मिला।
अकबर यहाँ दुनियावी समझदारी और इश्क़ की दीवानगी के फ़र्क़ को बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां कर रहे हैं। दुनियावी नफ़े-नुक़सान और चालाकी की दौड़ में तो एक से बढ़कर एक होशियार मिल जाते हैं, मगर बेख़ुदी और सच्चे समर्पण की राह में कोई किसी जैसा नहीं होता। शायर अपने महबूब की दीवानगी को बेमिसाल बताते हुए कहता है कि तुम्हारी जैसी बेपरवाह और सच्ची लगन पूरी दुनिया में किसी और के पास नहीं है।
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