“Why recount the tale of my beloved's love to the heedless? Listeners are easily found, but none who know the ache of pain.”
ग़ाफ़िल और बेपरवाह लोगों को अपने महबूब के इश्क़ की दास्तान क्या सुनाऊँ? सुनने वाले तो बहुत मिल जाते हैं, लेकिन दर्द को समझने वाला कोई नहीं मिलता।
शायर यहाँ दिल के गहरे अकेलेपन और अनकहे दर्द को बयां कर रहे हैं। दुनिया में महज़ तमाशा देखने या किस्सा सुनने वाले तो बहुत मिल जाते हैं, लेकिन उस दर्द को अपनी रूह से महसूस करने वाला कोई सच्चा हमदर्द नहीं मिलता। जब तक सामने वाला खुद उस तड़प से वाकिफ़ न हो, तब तक इश्क़ की दास्तान सुनाना बेमानी है क्योंकि बेपरवाह लोग जज़्बातों की गहराई को कभी नहीं समझ सकते।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
