ग़ज़ल

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं

فلسفی کو بحث کے اندر خدا ملتا نہیں
अकबर इलाहाबादी· Ghazal· 17 shers· radif: मिलता नहीं

यह ग़ज़ल कोरी दार्शनिक बहसों और तर्क के ज़रिए ईश्वर को तलाशने की निरर्थकता को रेखांकित करती है। शायर का मानना है कि जो इंसान अपनी ही जात और वजूद से बेख़बर है, वह केवल बुद्धि के बल पर ईश्वर की सच्ची पहचान हासिल नहीं कर सकता।

Source: rekhta · HI

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं डोर को सुलझा रहा है और सिरा मिलता नहीं
दार्शनिक को बहस और तर्क-वितर्क में ईश्वर नहीं मिलता। वह मानो धागे की उलझन को सुलझाने में लगा है लेकिन उसे उसका सिरा नहीं मिल पा रहा।
2
मा'रिफ़त ख़ालिक़ की आलम में बहुत दुश्वार है शहर-ए-तन में जब कि ख़ुद अपना पता मिलता नहीं
इस दुनिया में सृष्टिकर्ता (ख़ालिक़) को पहचानना बहुत कठिन है, जब इंसान को अपने ही शरीर के भीतर अपनी ख़ुद की पहचान या पता नहीं मिलता।
3
ग़ाफ़िलों के लुत्फ़ को काफ़ी है दुनियावी ख़ुशी आक़िलों को बे-ग़म-ए-उक़्बा मज़ा मिलता नहीं
ग़ाफ़िल (बेपरवाह) लोगों के आनंद के लिए दुनियावी ख़ुशी ही काफ़ी है, लेकिन अक़्लमंद लोगों को आख़िरत की फ़िक्र और ग़म के बिना कोई मज़ा नहीं मिलता।
4
कश्ती-ए-दिल की इलाही बहर-ए-हस्ती में हो ख़ैर नाख़ुदा मिलते हैं लेकिन बा-ख़ुदा मिलता नहीं
हे ईश्वर, ज़िंदगी के समंदर में दिल की कश्ती सलामत रहे; नाव चलाने वाले मल्लाह तो बहुत मिल जाते हैं, मगर कोई ख़ुदा का नेक और सच्चा बंदा नहीं मिलता।
5
ग़ाफ़िलों को क्या सुनाऊँ दास्तान-ए-इश्क़-ए-यार सुनने वाले मिलते हैं दर्द-आश्ना मिलता नहीं
ग़ाफ़िल और बेपरवाह लोगों को अपने महबूब के इश्क़ की दास्तान क्या सुनाऊँ? सुनने वाले तो बहुत मिल जाते हैं, लेकिन दर्द को समझने वाला कोई नहीं मिलता।
6
ज़िंदगानी का मज़ा मिलता था जिन की बज़्म में उन की क़ब्रों का भी अब मुझ को पता मिलता नहीं
जिन लोगों की महफ़िल में कभी ज़िंदगी का मज़ा मिलता था, आज मुझे उन की क़ब्रों का भी कोई पता या निशान नहीं मिलता।
7
सिर्फ़ ज़ाहिर हो गया सरमाया-ए-ज़ेब-ओ-सफ़ा क्या तअ'ज्जुब है जो बातिन बा-सफ़ा मिलता नहीं
जब सुंदरता और निखार की सारी पूँजी सिर्फ़ बाहरी दिखावे पर ही ख़र्च हो गई है, तो इसमें क्या आश्चर्य कि भीतर का मन या आत्मा पवित्र नहीं मिलती।
8
पुख़्ता तबओं पर हवादिस का नहीं होता असर कोहसारों में निशान-ए-नक़्श-ए-पा मिलता नहीं
दृढ़ और मजबूत स्वभाव वाले लोगों पर हादसों या मुसीबतों का कोई असर नहीं पड़ता, ठीक वैसे ही जैसे पहाड़ों पर पैरों के निशान नहीं मिलते हैं।
9
शैख़-साहिब बरहमन से लाख बरतें दोस्ती बे-भजन गाए तो मंदिर से टिका मिलता नहीं
शैख़ साहब ब्राह्मण से चाहे कितनी भी दोस्ती निभा लें, लेकिन भजन गाए बिना मंदिर से तिलक (या दान) नहीं मिलता।
10
जिस पे दिल आया है वो शीरीं-अदा मिलता नहीं ज़िंदगी है तल्ख़ जीने का मज़ा मिलता नहीं
जिस मधुर अदाओं वाले पर मेरा दिल आ गया है वह मुझे मिलता नहीं है, और उसके बिना ज़िंदगी कड़वी हो गई है तथा जीने का कोई मज़ा नहीं रह गया है।
11
लोग कहते हैं कि बद-नामी से बचना चाहिए कह दो बे उस के जवानी का मज़ा मिलता नहीं
लोग कहते हैं कि बदनामी से बचना चाहिए, लेकिन उन्हें कह दो कि इसके बिना जवानी का असली मज़ा नहीं मिलता।
12
अहल-ए-ज़ाहिर जिस क़दर चाहें करें बहस-ओ-जिदाल मैं ये समझा हूँ ख़ुदी में तो ख़ुदा मिलता नहीं
दिखावे और बाहरी बातों में उलझे लोग चाहे जितनी बहस कर लें, मैंने तो यही समझा है कि अहंकार या ख़ुदी में ईश्वर नहीं मिलता।
13
चल बसे वो दिन कि यारों से भरी थी अंजुमन हाए अफ़्सोस आज सूरत-आश्ना मिलता नहीं
वे दिन बीत गए जब महफ़िल दोस्तों से भरी रहती थी; हाय अफ़सोस, आज कोई जाना-पहचाना चेहरा भी नज़र नहीं आता।
14
मंज़िल-ए-इशक़-ओ-तवक्कुल मंज़िल-ए-एज़ाज़ है शाह सब बस्ते हैं याँ कोई गदा मिलता नहीं
इश्क़ और ईश्वर पर भरोसे (तवक्कुल) का मक़ाम बड़ी इज़्ज़त और सम्मान की जगह है; यहाँ रहने वाले सभी लोग बादशाह हैं और कोई भी फ़क़ीर या भिखारी नहीं मिलता।
15
बार तकलीफों का मुझ पर बार-ए-एहसाँ से है सहल शुक्र की जा है अगर हाजत-रवा मिलता नहीं
मुसीबतों का बोझ मेरे लिए किसी के एहसान के बोझ से अधिक आसान है। इसलिए यह शुक्र की बात है कि मेरी ज़रूरत पूरी करने वाला कोई मददगार नहीं मिलता।
16
चाँदनी रातें बहार अपनी दिखाती हैं तो क्या बे तिरे मुझ को तो लुत्फ़ ऐ मह-लक़ा मिलता नहीं
चाँदनी रातें भले ही अपनी पूरी बहार दिखाएँ, मगर हे चाँद जैसे मुखड़े वाले महबूब, तुम्हारे बिना मुझे इनमें कोई मज़ा या आनंद नहीं मिलता।
17
मा'नी-ए-दिल का करे इज़हार 'अकबर' किस तरह लफ़्ज़ मौज़ूँ बहर-ए-कश्फ़-ए-मुद्दआ मिलता नहीं
'अकबर' दिल के भावों का इज़हार किस तरह करे, क्योंकि अपने दिल की बात या मक़सद को ज़ाहिर करने के लिए कोई उपयुक्त शब्द ही नहीं मिलता।
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.