“The realm of love and sacred trust is a domain of high grace; Kings alone inhabit here, no beggar walks this place.”
इश्क़ और ईश्वर पर भरोसे (तवक्कुल) का मक़ाम बड़ी इज़्ज़त और सम्मान की जगह है; यहाँ रहने वाले सभी लोग बादशाह हैं और कोई भी फ़क़ीर या भिखारी नहीं मिलता।
शायर यहाँ रूहानी बुलंदी की बात कर रहे हैं, जहाँ सच्चा इश्क़ और खुदा पर मुकम्मल भरोसा (तवक्कुल) इंसान को बेहद सम्मानित मुक़ाम बख्शते हैं। जब कोई अपनी सारी ख्वाहिशें छोड़ कर खुदा के हवाले हो जाता है, तो उसके भीतर की तमाम मोहताजी मिट जाती है और वह रूहानी तौर पर बादशाह बन जाता है। इस पाकीज़ा मंज़िल पर कोई किसी के आगे हाथ फैलाने वाला फ़क़ीर नहीं रहता, बल्कि हर शख्स अपने दिल की सल्तनत का बेनियाज़ शहंशाह होता है।
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