“When all the wealth of grace and charm is spent on outward sheen, / What wonder then if purity of heart within is nowhere seen?”
जब सुंदरता और निखार की सारी पूँजी सिर्फ़ बाहरी दिखावे पर ही ख़र्च हो गई है, तो इसमें क्या आश्चर्य कि भीतर का मन या आत्मा पवित्र नहीं मिलती।
शायर इस शेर में इंसान की दिखावटी और खोखली ज़िंदगी पर एक गहरा तंज़ कर रहे हैं। जब हमने अपनी सारी तवज्जो, सलीका और संवारने की चाहत सिर्फ़ बाहरी दिखावे पर ख़र्च कर दी, तो फिर अंदर की पाकीज़गी और रूह की सफ़ाई का खो जाना लाज़मी ही है। यह शेर हमें याद दिलाता है कि सच्चा हुस्न दिल के बातिन में होता है, जिसे हमने ज़ाहिर की चमक-दमक के फेर में पूरी तरह भुला दिया है।
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