पुख़्ता तबओं पर हवादिस का नहीं होता असर कोहसारों में निशान-ए-नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

“Misfortunes leave no lasting mark upon the steadfast mind, just as on rugged mountain rocks no footprints can one find.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

दृढ़ और मजबूत स्वभाव वाले लोगों पर हादसों या मुसीबतों का कोई असर नहीं पड़ता, ठीक वैसे ही जैसे पहाड़ों पर पैरों के निशान नहीं मिलते हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर ने इंसान के मज़बूत और संजीदा मिज़ाज की तुलना विशाल चट्टानों और पहाड़ों से की है। जिस तरह पथरीले पहाड़ों पर चलने से कदमों के निशान नहीं छपते, ठीक वैसे ही ज़िंदगी के बड़े-बड़े हादसे और मुश्किलें भी पक्के इरादे वाले इंसान को अंदर से तोड़ नहीं पातीं। यह शेर हमें सिखाता है कि अगर हमारा आत्मबल पहाड़ की तरह अडिग हो, तो ज़माने की गर्दिशें हमारे वजूद पर कोई दाग़ नहीं छोड़ सकतीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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