“Such wondrous beauty, such apocalyptic grace; the Creator's divine power is made manifest on the day of Eid.”
ईद के दिन महबूब का बेमिसाल हुस्न और उसका क़यामत बरपा करने वाला श्रृंगार देखकर ईश्वर की असीम शक्ति और कारीगरी साफ़ दिखाई दे रही है।
ईद के ख़ास मौके पर जब महबूब सज-संवर कर सामने आता है, तो शायर उसकी बेमिसाल ख़ूबसूरती देखकर दंग रह जाता है। इस शेर में महबूब का यह हुस्न और उसका क़यामत बरपा करने वाला शृंगार सिर्फ़ दुनियावी हुस्न नहीं, बल्कि ख़ुदा की कु़दरत का जीता-जागता करिश्मा बन जाता है। ईद की रूहानी ख़ुशी और महबूब के दीदार का यह संगम आशिक़ के दिल को हैरत और परवरदिगार की बेपनाह कारीगरी की तारीफ़ से भर देता है।
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