ग़ज़ल
गले लगाएँ करें प्यार तुम को ईद के दिन
گلے لگائیں کریں پیار تم کو عید کے دن
यह ग़ज़ल ईद के पावन पर्व पर प्रेम और मिलन के उल्लास को दर्शाती है। शायर अपने महबूब के क़यामत-ख़ेज़ हुस्न और शृंगार की दिलकश तारीफ़ करते हुए इस मुबारक दिन पर उन्हें गले लगाने और प्यार बाँटने की तमन्ना ज़ाहिर करता है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
गले लगाएँ करें प्यार तुम को ईद के दिन
इधर तो आओ मिरे गुल-एज़ार ईद के दिन
हे मेरे गुलाब जैसे सुंदर चेहरे वाले महबूब, ईद के दिन इधर तो आओ ताकि हम तुम्हें गले से लगाएँ और तुमसे प्यार करें।
2
ग़ज़ब का हुस्न है आराइशें क़यामत की
अयाँ है क़ुदरत-ए-परवरदिगार ईद के दिन
ईद के दिन महबूब का बेमिसाल हुस्न और उसका क़यामत बरपा करने वाला श्रृंगार देखकर ईश्वर की असीम शक्ति और कारीगरी साफ़ दिखाई दे रही है।
3
सँभल सकी न तबीअ'त किसी तरह मेरी
रहा न दिल पे मुझे इख़्तियार ईद के दिन
ईद के दिन मेरी तबीयत किसी तरह भी सँभल नहीं सकी और मेरा अपने दिल पर कोई वश नहीं रहा।
4
वो साल भर से कुदूरत भरी जो थी दिल में
वो दूर हो गई बस एक बार ईद के दिन
पूरे साल से दिल में जो रंजिश और मैल भरा हुआ था, वह ईद के दिन एक ही बार में दूर हो गया।
5
लगा लिया उन्हें सीने से जोश-ए-उल्फ़त में
ग़रज़ कि आ ही गया मुझ को प्यार ईद के दिन
प्रेम के तीव्र आवेग में मैंने उन्हें अपने सीने से लगा लिया; सच तो यह है कि ईद के दिन आखिरकार मुझे उन पर प्यार आ ही गया।
6
कहीं है नग़्मा-ए-बुलबुल कहीं है ख़ंदा-ए-गुल
अयाँ है जोश-ए-शबाब-ए-बहार ईद के दिन
ईद के दिन कहीं बुलबुल का तराना सुनाई दे रहा है तो कहीं फूल खिलखिला रहे हैं; ऐसा लगता है मानो बहार की जवानी का पूरा जोश हर तरफ़ साफ़ नज़र आ रहा हो।
7
सिवय्याँ दूध शकर मेवा सब मुहय्या है
मगर ये सब है मुझे नागवार ईद के दिन
सेवइयाँ, दूध, चीनी और मेवे सब कुछ मौजूद हैं, लेकिन ईद के दिन यह सब मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है।
8
मिले अगर लब-ए-शीरीं का तेरे इक बोसा
तो लुत्फ़ हो मुझे अलबत्ता यार ईद के दिन
अगर मुझे तुम्हारे मीठे होंठों का एक बोसा (चुंबन) मिल जाए, तो ऐ दोस्त, ईद के दिन मुझे सचमुच बहुत मज़ा आ जाएगा।
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