सूरज में लगे धब्बा फ़ितरत के करिश्मे हैं बुत हम को कहें काफ़िर अल्लाह की मर्ज़ी है

“A spot upon the blazing sun is nature's wondrous deed; if idols call me infidel, by God's will 'twas decreed.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

सूरज पर धब्बा लगना कुदरत का करिश्मा है, और अगर बुत (या माशूक) हमें काफ़िर कहें तो यह अल्लाह की मर्ज़ी है।

विस्तार

यह शेर ग़ज़ब के तंज़ और सादगी से भरा है, जो ज़िंदगी के अजीबोगरीब विरोधाभासों पर मुस्कुराना सिखाता है। शायर कहता है कि जैसे सूरज जैसे रौशन सितारे पर भी दाग़ दिखना क़ुदरत का करिश्मा है, वैसे ही प्यार में भी कई उलटफेर होते हैं। सबसे दिलकश बात यह है कि जिसे हमने 'बुत' (माशूक़) मानकर पूजा, वही हमें काफ़िर कह रहा है—और शायर इस शिकवे को भी मुस्कुराकर 'अल्लाह की मर्ज़ी' मान लेता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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