“A spot upon the blazing sun is nature's wondrous deed; if idols call me infidel, by God's will 'twas decreed.”
सूरज पर धब्बा लगना कुदरत का करिश्मा है, और अगर बुत (या माशूक) हमें काफ़िर कहें तो यह अल्लाह की मर्ज़ी है।
यह शेर ग़ज़ब के तंज़ और सादगी से भरा है, जो ज़िंदगी के अजीबोगरीब विरोधाभासों पर मुस्कुराना सिखाता है। शायर कहता है कि जैसे सूरज जैसे रौशन सितारे पर भी दाग़ दिखना क़ुदरत का करिश्मा है, वैसे ही प्यार में भी कई उलटफेर होते हैं। सबसे दिलकश बात यह है कि जिसे हमने 'बुत' (माशूक़) मानकर पूजा, वही हमें काफ़िर कह रहा है—और शायर इस शिकवे को भी मुस्कुराकर 'अल्लाह की मर्ज़ी' मान लेता है।
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