ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है किसी को इस की ख़बर नहीं है मरीज़ का दम निकल रहा है

“All rejoice that the scalpel cuts so deftly in this operation, yet none perceives that the patient is drawing his very last breath.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

सब इस बात से खुश हैं कि ऑपरेशन में नश्तर खूब चल रहा है, मगर किसी को खबर नहीं कि मरीज़ की जान निकल रही है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने ऑपरेशन और निश्तर (सर्जिकल चाकू) के ज़रिए व्यवस्था और तथाकथित सुधारों पर बड़ा तीखा तंज़ किया है। बाहर से देखने वाले इस बात पर तालियाँ बजा रहे हैं कि बदलाव के लिए कितनी तेज़ी और सख़्ती से क़दम उठाए जा रहे हैं। मगर इलाज के इस तमाशे में किसी को यह होश ही नहीं है कि जिस मरीज़ को बचाने का दावा किया जा रहा था, वह इस बेरहम काट-छाँट की वजह से अपनी जान गँवा रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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