“It was not always found writhing in such torment; what can I say of the heart's beginning and its end?”
मैंने अपने दिल को हमेशा इस तरह तड़पते हुए नहीं देखा; अब मैं दिल की शुरुआत और उसके अंजाम के बारे में क्या कहूँ।
इस शेर में शायर अपने दिल की दास्तान बड़े दर्द और अपनेपन से बयाँ कर रहा है। वह याद करता है कि उसका दिल हमेशा से यूँ बेचैन और तड़पता हुआ नहीं था; कभी इसमें सुकून और मासूमियत भी थी। मोहब्बत के सफ़र ने दिल के 'आग़ाज़' यानी शुरुआत की शांति को उसके 'अंजाम' की बेबसी और तड़प में बदल दिया, और शायर इसी विडंबना पर हैरत और अफ़सोस जता रहा है।
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