“If you are surrendering your heart to that faithless one, O Akbar, then pause first and consider well the fate that awaits it.”
हे अकबर, अगर तुम अपना दिल उस बेवफ़ा को दे रहे हो, तो पहले अपने दिल के अंजाम के बारे में कुछ सोच लो।
यहाँ अकबर खुद को—या शायद किसी भी दीवाने आशिक को—एक दोस्त की तरह आगाह कर रहे हैं कि किसी बेपरवाह महबूब पर जान छिड़कने से पहले ज़रा ठहर जाओ। वे दिल को एक नाज़ुक तोहफ़े की तरह देखते हैं, जिसे किसी संगदिल के हवाले करने का मतलब सिर्फ और सिर्फ टूटना ही है। यह शेर इश्क़ की उस बेबस कशमकश को छूता है जहाँ अक्ल तो अंजाम जानती है, पर जज़्बात फिर भी ख़तरे की तरफ खिंचे चले जाते हैं।
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