“Lost to myself in the night's very first round of wine, let us see where the dawn finds me today.”
रात की शुरुआत में ही शराब के पहले दौर में हम अपनी सुध-बुध खो चुके हैं; अब देखना है कि आज सुबह हमें कहाँ ले जाती है।
इस शेर में शायर उस मदहोशी की बात कर रहा है जो रात की शुरुआत में ही उस पर छा गई है। पहले ही दौर के जाम में अपनी 'ख़ुदी' यानी अपने वजूद और होश को खो देना, इश्क़ या किसी गहरे जज़्बे में पूरी तरह डूब जाने का प्रतीक है। जब सफ़र के पहले ही क़दम पर यह आलम है, तो शायर बड़ी बेपरवाही और तजस्सुस से सोचता है कि न जाने सुबह होने तक वह किस मुक़ाम पर पहुँचेगा।
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