“O Lord, may this sudden closeness come to an auspicious end; / She always shared a bond with me, yet never to such an extent.”
हे ईश्वर, इस मेल-जोल और नजदीकी का अंजाम खैरियत से हो; उसका मुझसे रिश्ता तो पहले भी था, लेकिन इस हद तक कभी नहीं था।
यहाँ शायर अपने महबूब की अचानक बढ़ी हुई नज़दीकियों और बेपनाह मोहब्बत को देखकर ख़ुशी के साथ-साथ एक अजीब से ख़ौफ़ में मुब्तला है। वह दिल ही दिल में दुआ माँगता है कि इस नई और गहरी कुरबत का अंजाम अच्छा हो, क्योंकि माज़ी में कभी इतना तअल्लुक़ नहीं रहा। यह शेर मोहब्बत की उस नाज़ुक कैफ़ियत को छूता है जहाँ ज़रूरत से ज़्यादा क़रीब आना भी दिल में अनजाने बिछड़ने या फ़रेब का डर पैदा कर देता है।
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