“A whole lifetime is needed to endure the sting of love; where today is the sweet relish of a wounded heart?”
इश्क़ के डंक को सहने और बर्दाश्त करने के लिए एक पूरी उम्र चाहिए; आज मुझमें दिल के ज़ख़्म के दर्द का लुत्फ़ उठाने की वैसी ताक़त कहाँ है।
शायर यहाँ दिल की उस परिपक्वता की बात कर रहे हैं, जो इश्क़ के दर्द को भी एक नेमत बना देती है। इश्क़ का डंक (नीश-ए-इश्क़) शुरुआत में सिर्फ़ तड़प देता है; उसे सहने और उस ज़ख़्म में छिपे गहरे आनंद को महसूस करने के लिए पूरी उम्र की साधना चाहिए। शुरुआती दौर में दिल इतना सब्र और गहराई नहीं रखता कि वह दर्द में छिपी इस अनूठी मिठास का लुत्फ़ उठा सके।
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