ग़ज़ल

कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे

کہہ دو کوئی ساقی سے کہ ہم مرتے ہیں پیاسے

यह ग़ज़ल विरह की गहरी वेदना और प्रियतम की उपेक्षा से उपजी हताशा को व्यक्त करती है। इसमें प्यास और तड़प की पराकाष्ठा को दर्शाया गया है, जहाँ प्रेमी मदिरा न मिलने पर ज़हर पीने तक को तैयार है और उसकी सारी शिकायत केवल महबूब की बेरुखी से है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे गर मय नहीं दे ज़हर ही का जाम बला से
कोई साक़ी से कह दे कि हम प्यास से मरे जा रहे हैं; अगर शराब नहीं दे सकता, तो ज़हर का ही प्याला दे दे, कोई परवाह नहीं।
2
जो कुछ है सो है उस के तग़ाफ़ुल की शिकायत क़ासिद से है तकरार न झगड़ा है सबा से
मुझे जो भी शिकायत है, वह केवल महबूब की बेरुखी और उपेक्षा से है; मेरा न तो संदेशवाहक से कोई विवाद है और न ही सुबह की हवा से कोई झगड़ा है।
3
दल्लाला ने उम्मीद दिलाई तो है लेकिन देते नहीं कुछ दिल को तसल्ली ये दिलासे
बिचौलिये (दल्लाला) ने उम्मीद तो बंधाई है, लेकिन उसके ये दिलासे दिल को कोई तसल्ली और चैन नहीं दे पा रहे हैं।
4
है वस्ल तो तक़दीर के हाथ ऐ शह-ए-ख़ूबाँ याँ हैं तो फ़क़त तेरी मोहब्बत के हैं प्यासे
हे सुंदरों के बादशाह, हमारा मिलन तो भाग्य के हाथ में है, हम तो यहाँ केवल आपके प्रेम के प्यासे हैं।
5
प्यासे तिरे सर-गश्ता हैं जो राह-ए-तलब में होंटों को वो करते नहीं तर आब-ए-बक़ा से
जो प्यासे लोग तुम्हारी तलाश के रास्ते में भटक रहे हैं, वे आब-ए-हयात (अमरता के जल) से भी अपने होंठ गीले नहीं करते।
6
दर गुज़रे दवा से तो भरोसे पे दुआ के दर गुज़रें दुआ से भी दुआ है ये ख़ुदा से
हमने दुआ के भरोसे दवा का सहारा छोड़ दिया, और अब ख़ुदा से यही दुआ है कि हमें दुआ माँगने की भी ज़रूरत न रहे।
7
इक दर्द हो बस आठ पहर दिल में कि जिस को तख़फ़ीफ़ दवा से हो न तस्कीन दुआ से
दिल में हर पहर बस एक ऐसा दर्द बना रहे, जिसे न तो दवा से कोई कमी मिले और न ही दुआ से कोई सुकून हासिल हो।
8
'हाली' दिल-ए-इंसाँ में है गुम दौलत-ए-कौनैन शर्मिंदा हों क्यूँ ग़ैर के एहसान-ओ-अता से
ऐ हाली, इंसान के दिल में दोनों जहानों की दौलत छुपी हुई है, फिर हम किसी दूसरे के एहसान और बख्शीश के आगे क्यों शर्मिंदा हों?
9
जब वक़्त पड़े दीजिए दस्तक दर-ए-दिल पर झुकिए फ़ुक़रा से न झमकिये उमरा से
जब ज़रूरत या मुश्किल का वक़्त आए तो अपने दिल के दरवाज़े पर दस्तक दीजिए; न तो फ़क़ीरों के आगे झुकिए और न ही अमीरों के सामने इतराइए।
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