जो कुछ है सो है उस के तग़ाफ़ुल की शिकायत क़ासिद से है तकरार न झगड़ा है सबा से

“Whatever grievance exists is of her neglect alone; neither have I a dispute with the messenger, nor a quarrel with the breeze.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

मुझे जो भी शिकायत है, वह केवल महबूब की बेरुखी और उपेक्षा से है; मेरा न तो संदेशवाहक से कोई विवाद है और न ही सुबह की हवा से कोई झगड़ा है।

विस्तार

उर्दू शायरी में आशिक़ अक्सर अपना दिल बहलाने के लिए संदेशवाहक (क़ासिद) या सुबह की हवा (सबा) को दोष देते हैं कि शायद पैग़ाम पहुँचा ही नहीं। लेकिन इस शेर में शायर किसी भी झूठे दिलासे को ख़ारिज करते हुए सीधी बात करता है। उसे किसी दरमियानी से कोई शिकायत नहीं है, उसका सारा गिला सिर्फ़ महबूब की उस बेरुख़ी और अनदेखी (तग़ाफ़ुल) से है जो उसने जान-बूझकर बरती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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