यही अंजाम था ऐ फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ गुल ओ बुलबुल की शनासाई का

“Was this the destined end, O season of autumn, to the acquaintance of the rose and the nightingale?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

ऐ पतझड़ के मौसम, क्या फूल और बुलबुल के आपसी परिचय और प्रेम का यही अंजाम होना था?

विस्तार

उर्दू शायरी में गुल यानी फूल और बुलबुल का ताल्लुक़ बेपनाह मोहब्बत की मिसाल है। यहाँ शायर पतझड़ (ख़िज़ाँ) से बेहद ग़मगीन अंदाज़ में पूछता है कि क्या इस नाज़ुक और हसीन रिश्ते का अंजाम सिर्फ़ यही जुदाई और बर्बादी होना था? यह शेर वक़्त की उस बेदर्दी को उजागर करता है जो दो चाहने वालों की ख़ूबसूरत दुनिया को पलक झपकते ही वीरान कर देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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