तुम ने क्यूँ वस्ल में पहलू बदला किस को दा'वा है शकेबाई का

“Why did you turn away in the hour of union? Who ever laid claim to patient restraint?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

मिलन के समय तुमने पहलू क्यों बदल लिया? भला यहाँ किसे सब्र और संयम रखने का दावा है?

विस्तार

यह शेर मिलन के उस नाज़ुक और बेचैन लम्हे को बयां करता है, जहाँ आशिक़ अपने महबूब से पूछता है कि इतने क़रीब आकर भी उसने करवट क्यों बदल ली। शायर बड़े अपनेपन से कहता है कि मोहब्बत के इतने गहरे जज़्बात के बीच भला कौन सब्र और ज़ब्त का दावा कर सकता है? यहाँ महबूब की मासूम झिझक और दिल की बेक़रारी दोनों झलकती हैं, जहाँ मिलन की शिद्दत में किसी का भी ख़ुद पर क़ाबू नहीं रहता।

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