कली उर की मैं विकसित कर नहीं सकता, न मुरझा सकता; जीवन पा नहीं सकता, न मृत्यु ला सकता।
“The bud of my heart, I cannot make it bloom or wither; Life I cannot attain, nor can I bring forth death.”
— अमृत घायल
अर्थ
मैं अपने हृदय की कली को न तो खिला सकता हूँ और न मुरझा सकता हूँ। न तो मैं जीवन प्राप्त कर सकता हूँ और न मृत्यु ला सकता हूँ, जो मेरी पूर्ण असहायता को दर्शाता है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस पराकाष्ठा को बयां करता है, जहाँ इंसान अपनी इच्छाशक्ति को पूरी तरह छोड़ देता है। शायर कहते हैं कि दिल की कली को खिलाना या मुरझाना, जीवन देना या मृत्यु लाना—ये सब हमारे बस से बाहर है। यह एहसास है कि कुछ चीज़ों का होना या न होना, सिर्फ़ नियति के हाथ में है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
