लज्जा से झुकी पलकें मुझे पसंद हैं,
मन को भारी लगे, वह भार मुझे पसंद है।
“I like the eyelashes lowered with shyness, The burden that weighs upon the mind, I like that burden.”
— अमृत घायल
अर्थ
मुझे लज्जा से झुकी हुई पलकें पसंद हैं; जो भार मन को भारी लगता है, वह भार भी मुझे पसंद है।
विस्तार
यह शेर, अम्रुत घायल का, ज़ाहिर तौर पर दो चीज़ों की तारीफ़ करता है—एक की लज्जा और दूसरी का मन पर भारी पड़ना। शायर कहते हैं कि उन्हें वो पलकें पसंद हैं जो शर्म से झुकी हों.... और वो बोझ भी पसंद है जो दिल पर महसूस हो। यह गहरे एहसास को दिखाता है, जहाँ सादगी और उदासी दोनों ही खूबसूरत लगते हैं।
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