तू आएगा नहीं, यह थी निश्चितता फिर भी, निशदिन बार-बार हम चौखट तक गए।
“Of your non-arrival, I was quite certain, Yet day and night, to the threshold, I repeatedly returned.”
— अमृत घायल
अर्थ
मुझे पूरा यकीन था कि तुम नहीं आओगे, फिर भी मैं दिन-रात बार-बार देहरी तक जाता रहा।
विस्तार
यह शेर उस दिल की हालत बयान करता है, जो जानता है कि उसे कभी मोहब्बत नहीं मिलेगी। यह एक ऐसी विडंबना है, जहाँ दिमाग कहता है 'बस', लेकिन दिल बार-बार उस चौखट तक खींचा चला आता है। शायर बता रहे हैं कि नियति ने यह लिख दिया था कि आप नहीं आएँगे, फिर भी हम रोज़ उस दरवाज़े पर जाकर इंतज़ार करते रहे। यह इंतज़ार नहीं, ये उम्मीद की एक मजबूरी है।
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