“Be I a sinner, or steeped in error's thrall; I am Your servant, O God—I am something after all.”
चाहे मैं पापी होऊं या गलतियों से भरा हुआ, फिर भी मैं कुछ तो हूँ क्योंकि हे ईश्वर, मैं तेरा बंदा हूँ।
इस खूबसूरत शेर में शायर अपनी कमियों और गुनाहों को पूरी सच्चाई के साथ स्वीकार करता है। वह मानता है कि वह गलतियों का पुतला है, लेकिन साथ ही एक गहरा सुकून और मान भी महसूस करता है कि आख़िरकार वह ईश्वर का ही बंदा है। यह शेर एक मासूम भरोसे को बयां करता है—कि इंसान चाहे कितना भी गुनहगार क्यों न हो, खुदा से उसका नाता ही उसे वजूद, पहचान और रहमत की उम्मीद देता है।
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