“To Zafar, Majnun says: let us somewhere share our sad heart’s grief, / If from sorrow, for a single breath, we both could find relief.”
मजनूँ ज़फ़र से कहता है कि हम कहीं चलकर अपने दुखी दिल का दर्द बाँटें, अगर ग़म से हम दोनों को एक पल के लिए भी फ़ुरसत मिल सके।
इस शेर में 'ज़फ़र' अपनी तुलना इश्क़ के अमर प्रतीक मजनूँ से करते हुए एक बेहद मार्मिक मंज़र खींचते हैं। मजनूँ ज़फ़र से कहता है कि काश हम दोनों कहीं बैठकर अपने ग़मगीन दिलों का दर्द बाँट पाते, मगर त्रासदी यह है कि दोनों में से किसी को भी दर्द से एक पल की भी फ़ुरसत नहीं मिलती। यह शेर बतलाता है कि ग़म इतना गहरा और मुसलसल है कि एक-दूसरे को तसल्ली देने या अपना दुखड़ा रोने की ख़्वाहिश भी महज़ एक हसरत बनकर रह जाती है।
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