“In love, I bear no grief that peace and patience have flown away; Love's sorrow remained my steadfast companion—who cares if none else chose to stay!”
मुझे प्रेम में इस बात का कोई दुख नहीं है कि मेरा चैन और धैर्य बिल्कुल नहीं बचा। प्रेम का दुख तो मेरा साथी बना ही रहा, अब परवाह नहीं कि कोई और साथ रहा या नहीं।
शायर यहाँ एक बहुत ख़ूबसूरत बात कह रहे हैं कि इश्क़ में सुकून और सब्र का छिन जाना उन्हें ज़रा भी नहीं खलता। उन्हें दुनियादारी छूट जाने का कोई मलाल नहीं, क्योंकि इश्क़ का यह दर्द ही उनका सबसे सच्चा और वफ़ादार साथी बन गया है। जब मोहब्बत का ग़म ही हमसफ़र बनकर साथ चलने लगे, तो फिर कोई दूसरा साथ रहे या न रहे, इससे आशिक़ को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
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