आँखें हैं कटोरा सी वो सितम गर्दन है सुराही-दार ग़ज़ब और उसी में शराब-ए-सुर्ख़ी-ए-पाँ रखती है झलक फिर वैसी ही

“Her eyes are cup-like bowls of cruel torment, her neck a flagon wondrous and fine; and within it gleams, in that very same way, the betel leaf's ruby-tinted wine.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

महबूब की आँखें कटोरे जैसी क़यामत ढाने वाली हैं और गर्दन सुराही की तरह बेहद खूबसूरत है, जिसमें पान की सुर्खी शराब की तरह साफ़ झलकती है।

विस्तार

इस शे’र में शायर ने महबूब के हुस्न का बड़ा ही नशीला और दिलकश नक़्शा खींचा है। माशूक़ की बड़ी-बड़ी आँखें शराब के प्याले जैसी हैं और उसकी सुडौल गर्दन एक नफ़ीस सुराही की मानिंद क़यामत ढा रही है। कमाल यह है कि पान खाने के बाद जो लाली उसके गले से उतरती है, वह शीशे की सुराही में छलकती लाल शराब की तरह साफ़ नज़र आती है, जो देखने वाले को पूरी तरह मदहोश कर देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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