है नाफ़ कोई गिर्दाब-ए-बला और गोल सुरीं रानें हैं सफ़ा है साक़ बिलोरीं शम-ए-ज़िया पाँव की कफ़क फिर वैसी ही

“A vortex of peril is the navel, round are the hips, and smooth the thighs so clear; / Crystal shins like radiant candles, and the soles of the feet just as rare.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

प्रेमिका की नाभि आफ़त का भँवर है, नितंब गोल हैं और जांघें साफ़ व चिकनी हैं; बिल्लौरी पिंडलियाँ रोशन शमा की तरह हैं और पैरों के तलवे भी उतने ही खूबसूरत हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर 'सरापा' की ख़ूबसूरत रिवायत के तहत महबूब के जिस्मानी हुस्न और नफ़ासत का दिलकश मंज़र खींच रहा है। नाफ़ को आफ़त का ऐसा भँवर बताया गया है जो देखने वाले को अपनी कशिश में खींच लेता है, और पिंडलियों को रौशन शमा व बिल्लौर जैसा शफ़्फ़ाफ़ कहा गया है। यह शेर महबूब के हुस्न के तिलिस्म और उसकी दिलरुबा नज़ाकत को पूरी शिद्दत से बयान करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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