नौ-ख़ेज़ कुचें दो ग़ुंचा हैं है नर्म शिकम इक ख़िर्मन-ए-गुल बारीक कमर जो शाख़-ए-गुल रखती है लचक फिर वैसी ही

“Her budding breasts are two tender rosebuds, her soft belly a harvest of flowers; her slender waist, like a blossoming bough, sways with that very same supple grace.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

उसका नया उभार दो कलियों जैसा है और उसका कोमल पेट फूलों के ढेर के समान है; उसकी पतली कमर फूलों की डाली की तरह वैसी ही लचक रखती है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब के हुस्न और नज़ाकत को एक महकते हुए गुलशन की तरह तराशा है। कलियों, फूलों के ढेर और नाज़ुक शाख़ की उपमाओं के ज़रिए यहाँ जवानी की ताजगी और कोमलता को बहुत शिद्दत से महसूस कराया गया है। फूलों की टहनी की तरह लचकती हुई कमर का यह मंज़र महबूब की सहज ख़ूबसूरती और उसके अंदाज़ की दिलकशी को बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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