मीना-ए-नुह-फ़लक है कहाँ बादा-ए-नशात शीशे हैं ये तो ज़हर-ए-हलाहल के चार पाँच

“Where in the decanter of the nine heavens is the wine of delight? / These are merely four or five flasks of deadly poison.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

नौ आसमानों की इस सुराही में ख़ुशी की शराब कहाँ है? ये तो बस जानलेवा ज़हर से भरे चार-पाँच शीशे (बोतलें) हैं।

विस्तार

शायर इस असीम कायनात और नौ आसमानों को शराब की एक सुराही मानकर पूछता है कि ज़िंदगी में ख़ुशी और सुकून की मय आख़िर कहाँ है? यहाँ तो इंसान को राहत के बदले सिर्फ़ जानलेवा ज़हर से भरे कुछ प्याले ही नसीब होते हैं। यह शेर दुनिया की बेरुख़ी और ज़िंदगी में मिलने वाले गहरे रंज-ओ-ग़म का एक बेहद दर्दनाक और सच्चा अफ़साना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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