“Had someone made false promises to you, just as you do to me, / Tell me in all fairness—would you have believed them true?”
अगर तुम्हारी तरह कोई तुमसे झूठे वादे करता, तो तुम ही इंसाफ़ से बताओ, क्या तुम्हें उस पर भरोसा होता?
यहाँ शायर अपने महबूब से कोई कड़वा गिला नहीं कर रहा, बल्कि बड़े प्यार और नज़ाकत से आईना दिखा रहा है। वह महबूब को अपनी जगह रखकर पूछता है कि अगर तुम्हारे साथ भी कोई ऐसे ही झूठे वादे करता, तो क्या तुम्हारा दिल सचमुच उस पर यक़ीन कर पाता? यह शेर मोहब्बत में टूटे हुए भरोसे के दर्द और महबूब से सच्ची हमदर्दी की उम्मीद को बड़ी सादगी से बयां करता है।
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