हैदराबाद और लंगर याद है अब के दिल्ली में मोहर्रम क्या करें

“Remembering Hyderabad and the grand Langar processions of old, / What can one do with Muharram now in Delhi?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मुझे हैदराबाद और वहाँ का मशहूर लंगर याद आ रहा है; अब इस बार दिल्ली में भला मुहर्रम कैसे मनाएँ।

विस्तार

इस शेर में शायर हैदराबाद की उस ख़ास रूहानियत और शान-ओ-शौकत को याद कर रहा है, जहाँ मुहर्रम के दौरान 'लंगर' का ऐतिहासिक और अज़ीम जुलूस निकला करता था। दिल्ली में रहते हुए भी उसका दिल दकन की उन पुरअसर यादों में अटका है, जिससे दिल्ली का मुहर्रम उसे बेहद फीका और अधूरा महसूस होता है। यह सिर्फ दो शहरों का मुक़ाबला नहीं, बल्कि अपने महबूब वतन और उसकी अज़ीम तहज़ीब से बिछड़ने का गहरा दर्द है।

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