“Know this well: you are not one to be ever forgotten; / O Dagh, how could we ever banish you from our heart?”
यह बात अच्छी तरह याद रखो कि तुम भूलने की चीज़ नहीं हो। ऐ 'दाग़', हम तुम्हें अपने दिल से कैसे भुला सकते हैं?
इस ख़ूबसूरत और शोख़ शेर में दाग़ देहलवी ने बड़े नाज़-ओ-अंदाज़ से यह दिखाया है मानो उनका महबूब ख़ुद उनसे कह रहा हो कि तुम भुला देने की चीज़ नहीं हो। यहाँ 'दाग़' तख़ल्लुस के साथ एक प्यारा सा इल्हाम (दोहरा अर्थ) भी है—जैसे किसी ज़ख़्म का 'दाग़' कभी मिटाया नहीं जा सकता, वैसे ही शायर की याद भी दिल पर हमेशा के लिए छप चुकी है। यह शेर इश्क़ की मीठी मनुहार, हल्की सी शोख़ी और गहरे अपनेपन से भरा हुआ है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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