रोते हैं ग़ैर का रोना पहरों ये हँसी मुझ से हँसा करते हैं

“For hours on end they weep over another's woe, / Yet at my expense, this mocking laughter they bestow.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

वे घंटों दूसरों के दुख पर आंसू बहाते हैं, लेकिन मेरी हालत पर केवल हंसते हैं और मेरा मजाक उड़ाते हैं।

विस्तार

इस शेर में इश्क़ की एक बहुत कड़वी और दर्दनाक सच्चाई बयां की गई है। आशिक़ बड़ी बेबसी से देखता है कि महबूब गै़रों के दुख-दर्द पर तो घंटों आंसू बहाता है, मगर जब बात उसके अपने सच्चे दर्द की आती है, तो वह बस मज़ाक उड़ाकर हँस देता है। यह तंज और बेरुखी उस गहरे अकेलेपन को दिखाती है, जहाँ सब कुछ लुटाकर भी बदले में सिर्फ़ उपहास मिलता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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