“The one they call a houri—in human form, it is none but you; / The one for whom my soul departs—my very life, it is you!”
लोग जिसे हूर कहते हैं, इंसान के रूप में वह तुम्हीं तो हो, और जिस पर मेरी जान न्योछावर होती है, मेरी जान वह भी तुम्हीं तो हो।
यह शेर आशिक़ के दिल का एक बेहद सीधा और गहरा इज़हार है, जिसमें वह अपनी माशूक़ की खूबसूरती और अहमियत को बयां कर रहा है। पहली पंक्ति में वह कहता है कि जन्नत की जिस हूर की बातें दुनिया करती है, ज़मीन पर इंसानी रूप में वो कोई और नहीं बल्कि तुम ही हो। दूसरी पंक्ति में 'जान' लफ़्ज़ का बड़ा प्यारा इस्तेमाल है—वह जिसे प्यार से 'मेरी जान' कहता है, दरअसल उसी के लिए अपनी जान न्योछावर करने को भी तैयार है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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