अगरचे देखने वाले तिरे हज़ारों थे तबाह-हाल बहुत ज़ेर-ए-बाम किस का था

“Though thousands were there gazing upon your sight, beneath your balcony, who stood in such ruined plight?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

हालाँकि तुम्हें देखने वाले हज़ारों लोग थे, लेकिन तुम्हारी छत के नीचे वह कौन था जिसकी हालत इस कदर तबाह और बदहाल थी?

विस्तार

शायर यहाँ एक दिलकश मंज़र पेश करता है जहाँ महबूब को अपनी बालकनी या छत पर देखने के लिए हज़ारों की भीड़ उमड़ी है। मगर शायर पूछता है कि उस भीड़ में वो कौन था जो सिर्फ़ दीदार नहीं कर रहा था, बल्कि उसके छज्जे के नीचे अपनी पूरी हस्ती लुटाए, बर्बाद खड़ा था। यह शेर आम तमाशाइयों और सच्चे आशिक़ के फ़र्क़ को बड़ी ख़ूबसूरती से उजागर करता है—हुस्न की तारीफ़ तो कोई भी कर सकता है, पर इश्क़ में ख़ुद को तबाह सिर्फ़ सच्चा प्रेमी ही करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.