“Why did you not unleash Doomsday in the rival's street? For whose regard did you restrain your graceful stride?”
आपने दुश्मन की गली में क़यामत क्यों नहीं बरपा की? नाज़-ओ-अंदाज़ से चलते वक़्त आपको आख़िर किसका लिहाज़ था?
उर्दू शायरी में महबूब की दिलकश चाल को क़यामत ढाने वाला माना जाता है, जो हर देखने वाले के होश उड़ा देती है। यहाँ आशिक़ हल्की सी जलन और लाड़ के साथ महबूब से सवाल कर रहा है कि जब तुम रक़ीब (दुश्मन) की गली से गुज़रे, तो वहाँ वो हलचल क्यों नहीं मचाई? वो प्यार भरे शिकवे में पूछ बैठता है कि आख़िर तुम किस का मान रखने के लिए अपनी नाज़ुक और क़ातिल अदाओं को यूँ रोक कर चल रहे थे।
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