“If weary of life, O Dagh, then why do you live on? You hold not life dear, yet you do not depart.”
ऐ दाग़, अगर तुम ज़िंदगी से इतने तंग आ चुके हो तो फिर ज़िंदा क्यों हो? तुम्हें अपनी जान प्यारी भी नहीं है और तुम मरते भी नहीं हो।
इस शेर में दाग़ साहब अपने ही दिल से एक प्यारी सी शिकायत और सवाल कर रहे हैं, जो हर टूटे हुए दिल की सच्चाई बयां करता है। वो कहते हैं कि अगर ज़िंदगी से इतने ही बेज़ार हो और यह जान भी अज़ीज़ नहीं रही, तो फिर इसे छोड़े क्यों नहीं देते? असल में यह दिल टूटने के बाद का वो अजीब सा हाल है, जहाँ इंसान दर्द से थक तो जाता है, मगर अंदर ही अंदर किसी अनकही उम्मीद के सहारे साँसें लेता रहता है।
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