ग़ैर यूँ करता है मेरी पुर्सिश उस के हिज्र में
बे-तकल्लुफ़ दोस्त हो जैसे कोई ग़म-ख़्वार-ए-दोस्त
“My rival asks of my state, in her separation's blight,As if an intimate friend, a sharer of my plight.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरा प्रतिद्वंद्वी उसकी जुदाई में मेरा हाल ऐसे पूछता है, जैसे वह मेरा कोई घनिष्ठ मित्र या मेरे दुख का साथी हो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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