अंदाज़-ए-नाला याद हैं सब मुझ को पर 'असद'
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा
“All manners of lament, I still recall, Asad,But the heart I once treasured, that heart is no more.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मुझे आहें भरने के सभी तरीके याद हैं, असद, लेकिन जिस दिल पर मुझे नाज़ था, वह दिल अब नहीं रहा।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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